ISSN NO: 2581-8074 मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान की अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका (Multidisciplinary) Peer Reviewed Journal
Magazine Cover

नया अंक, जुलाई 2023

जब सब कुछ बिकाऊ हो, मनुष्य की पहचान एक उपभोक्ता से ज्यादा न हो, मानवीय रिश्तों की मिठास कम होती जा रही हो, जीवन मनोविकारों का शिकार होता जा रहा हो तब ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में साहित्यिक पत्रिकाओं का प्रकाशन एक महत्वपूर्ण रचनात्मक पहल है। इसके माध्यम से न केवल नए- नए रचनाकारों की सृजन धर्मिता से परिचय होगा अपितु उनके माध्यम से वर्तमान साहित्यिक कलेवर को जानने समझने का एक अवसर भी मिलेगा। पत्रिका का यह अंक कई स्तर से विशिष्ट है क्योंकि इसमें विषय विविधता के साथ-साथ साहित्यिक स्वाद के कई फ्लेवर मिलते हैं। मुझे विश्वास है कि पत्रिका का यह अंक आपके ज्ञानवर्धन में सहायक सिद्ध होगा...

शुभकामनाओं सहित!

(संपादकीय से)

- डॉ. मलखान सिंह

प्रचेतस

मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान की अन्तर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका (Multidisciplinary)

अंक 01

गिरीश कर्नाड के नाटक ‘नागमंडल’ की तात्विक समीक्षा

गिरीश कर्नाड के नाटक ‘नागमंडल’ की तात्विक समीक्षा

संदीप शर्मा

समीक्षा
वैश्वीकरण और भारतीय संस्कृति

वैश्वीकरण और भारतीय संस्कृति

प्रो. रसाल सिंह, डॉ पीयूष कुमार

शोध आलेख
'विश्वप्रपंच’ की भूमिका और भारत बोध

'विश्वप्रपंच’ की भूमिका और भारत बोध

डॉ. आलोक कुमार सिंह

शोध आलेख
परफेक्शन को पाने की ललक

परफेक्शन को पाने की ललक

डॉ. धीरेन्द्र कुमार

शोध आलेख
नागार्जुन के काव्य में संवेदना के विविध स्वर

नागार्जुन के काव्य में संवेदना के विविध स्वर

सुमित कुमार चौधरी

शोध आलेख
कुमार अंबुज की कविता और उनका आत्मसंघर्ष

कुमार अंबुज की कविता और उनका आत्मसंघर्ष

यशवंत

शोध आलेख
अरुणाचल प्रदेश के गालो जनजाति: समाज एवं संस्कृति (‘मिनाम’ उपन्यास के विशेष संदर्भ में)

अरुणाचल प्रदेश के गालो जनजाति: समाज एवं संस्कृति (‘मिनाम’ उपन्यास के विशेष संदर्भ में)

उद्देश्य सिंह

शोध आलेख
समकालीन ओड़िआ कहानी के विविध आयाम

समकालीन ओड़िआ कहानी के विविध आयाम

बिश्वजीत कलता

शोध आलेख
Default article image

राष्ट्रीय शिक्षा नीति और आत्मनिर्भर भारत

अमित कुमार यादव

शोध आलेख
कामायनी का पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता

कामायनी का पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता

संजय साव

शोध आलेख
कलंक

कलंक

प्रवीण कुमार सहगल

कहानी
ईश्वर काका

ईश्वर काका

निशा सहगल

कहानी
तितास एक नदी का नाम

तितास एक नदी का नाम

महेंद्र सिंह

समीक्षा
बचपन की सुनहरी यादों का जीवंत दस्तावेज: ‘बाली उमर’

बचपन की सुनहरी यादों का जीवंत दस्तावेज: ‘बाली उमर’

बिश्वजीत कलता

समीक्षा
ग़म के नाम…

ग़म के नाम…

कुलदीप सिंह

कविता
लीलाधर मंडलोई जी से डॉ मलखान सिंह की बातचीत

लीलाधर मंडलोई जी से डॉ मलखान सिंह की बातचीत

डॉ. मलखान सिंह

विविधा
एक अलम-नसीब बेटे की कविता

एक अलम-नसीब बेटे की कविता

आमिर हमज़ा

कविता
Default article image

संपादक की कलम से …

डॉ. मलखान सिंह

सम्पादकीय

प्रकाशित अंक