सूचना क्रांति के इस युग में जब भी किसी नई तकनीक ने क्रांतिकारी स्तर पर दस्तक दी है, शिक्षा इसके अनुप्रयोगों में से एक रहा है। साठ के दशक में जब भारत में टेलीविजन युग ने दस्तक दी तो इसे भी‘खेड़ा परियोजना’ के रूप में स्कूली बच्चों के शैक्षिक पाठ्यक्रमों से जोड़कर टीवी चैनलों पर विस्तार दिया गया। गुजरात का खेड़ा जिला जो भारत में शिक्षा को सूचना क्रांति से जोड़ने का प्रथम गवाह बना वह सरदार पटेल के जन्म, गांधी के सत्याग्रह का भी गवाह रहा है। अब एक बार फिर जब भारत सूचना क्रांति के डिजिटल युग पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है, हमारी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, सरदार पटेल के दृढ संकल्प और गांधी की आत्मनिर्भरता को आत्मसात करते हुए शिक्षा में क्रांति की आधारशिला रखने के रूप में सामने आई है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 का खास जोर ऑनलाइन शिक्षा पर है, जिसका आशय कहीं भी, किसी भी समय इंटरनेट व अन्य संचार उपकरणों की सहायता से प्राप्त की जाने वाली शिक्षा से है। ऑनलाइन शिक्षा के विभिन्न रूप है, जिसमें वेब आधारित लर्निंग, मोबाइल आधारित लर्निंग और वर्चुअल क्लासरूम इत्यादि शामिल है। ऑनलाइन व्यवस्था उन छात्रों को एक अवसर प्रदान करता है जो भौतिक रूप से कॉलेज या विश्वविद्यालय तक अपनी पहुंच नहीं स्थापित कर सकते हैं।
ऑनलाइन शिक्षा बच्चों को कॉपी-किताब के बोझ से बाहर निकालकर उनके अंदर की रचनात्मकता को बढ़ावा देती है तथा इससे श्रम और समय का भी बचत होता है। यह आज की जरूरत है कि जब शिक्षा के पारंपरिक और विशेष साधन सम्भव न हो, वहां हम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के वैकल्पिक साधनी जैसे- ऑनलाइन शिक्षा के साथ तैयार हो। यह पद्धति उनके लिए प्राणवायु के समान है जो किन्ही कारणों मुख्यतः शारीरिक अक्षमता, स्कूल तक पहुंच, सामाजिक संकीर्णताओं आदि की वजह से स्कूल जाने में असमर्थ है। इससे सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि होगी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति का एक प्रमुख लक्ष्य है।
ऑनलाइन शिक्षा की कुछ विशेषताएं ऐसी भी हैं जो इसे अन्य शैक्षणिक पद्धतियों से बेहतर बनाती हैं। इस पद्धति से उन शिक्षकों के विकल्प के रूप में बेहतर शिक्षक उपलब्ध होंगे जो लापरवाही बरतते हुए अपने शैक्षणिक कर्तव्यों का समुचित रूप से निर्वहन नहीं करते है, जिसका खामियाजा छात्रों को वर्तमान और भविष्य में भुगतना पड़ता है। ऑनलाइन शिक्षा से छात्रों को देश की सर्वोच्च संस्थाओं के कुशल और सृजनशील शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिलेगा। इस पद्धति से सामाजिक सशक्तीकरण और शिक्षा के जनतंत्रीकरण को बढ़ावा मिलेगा। प्रत्येक व्यक्ति और समुदाय चाहे वोमहिला हो या पुरुष, सशक्त होना चाहता है। उनके इस महत्वाकांक्षा को प्राप्त करने में ऑनलाइन मोड़ बिना किसी पूर्वाग्रह के सहायक होगा। शैक्षणिक जनतंत्रीकरण का तात्पर्य लोगों तक शिक्षा की समान पहुंच से है। इस प्रणाली के मार्ग में कोई भी सामाजिक-सांस्कृतिक कुरीति बाधा नहीं बन सकती है।
ऑनलाइन शिक्षा के समक्ष कई चुनौतियां या बाधाएं हैं, जो इसको भारत जैसे विकासशील देश में लागू करने में समस्या उत्पन्न कर रही है। वर्तमान सरकार और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने इन चुनौतियों का विस्तार से जिक्र किया और उससे निपटने के लिए कई प्रयास करने का सुझाव दिया है। जिससे भारत अपनी तकनीकी और व्यवस्थाओं से आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर हो सके और प्रधानमंत्री के विजन 2047 को साकार बनाने में महती भूमिका निभा सके। चुनौती के रूप में एक प्रश्न उठता है कि क्या ऑनलाइन शिक्षा, भौतिक रूप से दी जा रही शिक्षा का स्थायी विकल्प हो सकता है? ऑनलाइन शिक्षा से जिन हानियों के उत्पन्न होने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है उसको दूर करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 में साफ- साफ कहा गया है कि छात्र को उपकरणों की आदत, ई-कंटेट का सबसे पसंदीदा प्रारूप आदि को लाया जाएगा तथा आधुनिक से आधुनिक व्यवस्था और कक्ष व पाठ्यक्रम निर्धारण के लिए NETF, CIET, NIOS, IGNOU, IIT NIT आदि जैसी उपयुक्त संस्थाओं का सहारा लिया जायेगा।
ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली में व्यापक स्तर पर असमानता दृष्टिगत होती है। सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त विद्यार्थियों के अनुकूल ही यह पद्धति है। देश का एक बहुत बड़ा तबका जो डिजिटली सम्पन्न नहीं है वह इससे दूर हो जाता है। आंकड़ों की बात करें तो भारत में इंटरनेट पेनिट्रेशन 50 प्रतिशत है यानी भारत की आधी आबादी को ही गुणवतापूर्ण इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है, जो सभी को एक समान ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध कराने में एक बड़ी बाधा है। साथ ही नैटवर्क प्रदाता कंपनियों ने रिचार्ज मूल्य को महंगा कर आम आदमी की पहुंच से बाहर कर दिया है। हालांकि महामारी के बाद तमाम सरकारी प्रयासों के बाद आर्थिक तंगी से लोग बाहर निकल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी लोगों की इतनी क्षमता नहीं हुई है कि वे ऑनलाइन मोड के उपकरण व जरूरी संसाधनों तक अपनी पहुंच स्थापित कर सके। वर्तमान भारत सरकार का हमेशा से ध्येय ‘सबका साथ, सबका विकास’ रहा है। इसी समावेशी विकास संकल्पना को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वैश्विक महामारी जैसी परिस्थिति से अपनी दूरदर्शी योजनाओं- आत्मनिर्भर भारत अभियान, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, आयुष्मान भारत, मेक इन इंडिया, कुटीर उद्योगों को बढ़ावा, MSME को प्रोत्साहन आदि के माध्यम से लोगों को बाहर निकलने में मदद प्रदान कर रही है और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने पर जोर दे रही है। इसी क्रम में ऑनलाइन शिक्षा तक लोगों की पहुंच बनाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को आधार बनाकर आगामी पांच वर्षों में (2025-26) देश भर के चालीस फीसदी कॉलेज और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को टैबलेट या लैपटॉप मुहैया कराने पर सहमति व्यक्त की है। डिजीशक्ति मिशन के तहत इस कार्य कोतीव्रगति से किया जा रहा है। वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल (2017-22) में उत्तर प्रदेश में टेबलेट वितरण का काम कर शैक्षिक सशक्तिकरण प्रदान किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार भी विश्वविद्यालयों (जैसे – BHU…) में इस योजना को साकार कर रही है।
डिजिटल डिवाइड की समस्या भी व्यापक स्तर पर दिखाई देती है। डिजिटल डिवाइड की स्थिति उसे कहते हैं जब किसी क्षेत्र का एक हिस्सा wifi और संचार उपकरण संपन्न हो जबकि दूसरा हिस्सा सभी अत्याधुनिक सुविधा से दूर है। यह समस्या कोरोना के दौरान मेरे जैसे कई सहपाठियों ने उठाई है। इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या इतने बड़े स्तर पर उभर के सामने आई की खेत-खलिहान के कहीं कोने में नेटवर्क पकड़ता था, ऐसी स्थिति में बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ा। यहीं नहीं डिजिटल डिवाइड की स्थिति विश्वविद्यालयों के स्तर पर भी देखने को मिल रहा है, कुछ विश्वविद्यालयों में wifi युक्त कैंपस, डिजिटली जागरुकता तो है जबकि कई विश्वविद्यालयों में अब भी इससे कोसों दूरी बरकरार है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इस डिजिटल अंतर को कम करने को कहा गया है, “इस तथ्य को देखते हुए कि अभी भी जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है, जिसकी डिजिटल पहुँच अत्यधिक सीमित है, मौजूदा जनसंचार माध्यम जैसे टेलीविजन, रेडियो और सामुदायिक रेडियो का उपयोग टेलीकास्ट और प्रसारण के लिए बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इस तरह के शैक्षिक कार्यक्रमों को छात्रों की बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न भाषाओं में 24/7 उपलब्ध कराया जाएगा। सभी भारतीय भाषाओं में सामग्री पर विशेष ध्यान दिया। जाएगा और इस पर विशेष बल दिया जाएगा कि जहाँ तक संभव हो, शिक्षकों और छात्रों को डिजिटल सामग्री उनकी सीखने की भाषा में पहुंचे।”
इसके अलावा शिक्षा के क्षेत्र में खुले, परस्पर विकसित, सार्वजनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल दिया गया है। वर्तमान सरकार प्रायः सभी स्कूल और कॉलेज परिसरों को वाईफाई से युक्त करने की कोशिश कर रही है, डिजिटल और स्मार्ट कक्षाओं से लेकर पुस्तकालयों तक को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की कोशिश जारी है (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने अपनी लाइब्रेरी ऑनलाइन कर रखी है)।
कई विषयों में छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा की जरूरत होती है जो ऑनलाइन मोड में पूरा नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में उद्धरित है कि वर्चुअल लैब बनाने के लिए दीक्षा, स्वयम् और स्वयंप्रभा जैसे मौजूदा ई-लर्निंग प्लेटफार्म का उपयोग किया जायेगा, ताकि सभी छात्रों को गुणवत्तापूर्ण व्यावहारिक और प्रयोग-आधारित (Practical) अनुभव का समान अवसर प्राप्त हो। एसडीजी छात्रों और शिक्षकों को पहले से लोड की गई सामग्री वाले टैबलेट जैसे उपयुक्त डिजिटल उपकरण पर्याप्त रूप से देने की संभावना पर विचार किया जायेगा और उन्हें विकसित किया जायेगा।
एक अन्य समस्या के रूप में शिक्षकों द्वारा अनुभव की जा रही समस्या है कि उन्हें ऑनलाइन शिक्षा प्रदान करने का कोई अनुभव नहीं है और न ही वैसा क्लासरूम वाला परिवेश मिल पा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने इस सिलसिले में बड़ा परिवर्तन किया है, पहले जहाँ शिक्षण प्रक्रिया शिक्षक-केंद्रित रहती थी अब उसको बदलकर शिक्षार्थी केंद्रित कर दिया गया है। अब शिक्षकों को शिक्षार्थी केंद्रित अध्यापन में गहन प्रशिक्षण दिया जायेगा और यह भी बताया जायेगा कि वे ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों और उपकरणों का उपयोग करके उच्चतर गुणवता वाली ऑनलाइन सामग्री का स्वयं सृजन करेंगे। ई-सामग्री के साथ-साथ छात्रों में आपसी सहयोग स्थापित करने के लिए शिक्षक की भूमिका पर जोर दिया जायेगा।
क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्य सामग्री की अभावग्रस्तता को दूर करने के लिए वर्तमान सरकार 2014 के बाद से ही प्रतिबद्ध है। इस नीति में भी उनका यह विजन झलकता है और वह ऑनलाइन मोड में सामग्री बनाने, प्रशिक्षित शिक्षक आदि समस्याओं के निराकरण की बाद कर चुकी है।
इन सबके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति में एक राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी मंच की स्थापना की भी बात किया गया है। जिसमें विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी हेतु और प्रशासन में अभिवृद्धि हेतु दीक्षा, स्वयम् जैसे उपयुक्त ई-लर्निंग प्लेटफार्म का विस्तार किया जायेगा। इसके साथ ही ऑनलाइन मूल्यांकन और प्रशिक्षण और परीक्षाओं के लिए उपयुक्त निकाय, जैसे कि प्रस्तावित राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र अथवा ‘परख’, स्कूल बोर्ड, NTA और अन्य चिन्हित मूल्यांकन रूपरेखाओं का निर्धारण करेंगे और कार्यान्वित करेंगे। 21वीं सदी के कौशल पर ध्यान केंद्रित करते हुए (शिक्षा टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर मूल्यांकन और परीक्षाओं के नए तरीकों का अध्ययन किया जायेगा। NTA ने विभिन्न विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं को स्नातक, परास्नातक और पीएचडी स्तर पर कॉमन एंट्स करवाना 2022-23 सत्र से शुरू कर दिया है इसके अलावा मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं को एकीकृत संरचना में किया गया है।
विश्वस्तरीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शैक्षिक डिजिटल सामग्री और क्षमता निर्माण के लिए वर्तमान सरकार कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में मुस्तैदी से अपने कार्य को गति प्रदान कर रही है। प्रोफेसरों को व्याख्यानों को रिकॉर्ड कर उन्हें उचित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने की प्रक्रिया को तीव्रता प्रदान की गई है। पहले से चल रहे MOOC और SWAYAM पोर्टल को सरकार और विस्तारित करना शुरू कर दी है। ऑनलाइन शिक्षा की तरफ वर्तमान सरकार क्रांतिकारी कदम उठाते हुए 2022- 23 के बजट में डिजिटल विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की है। यह अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय है क्योंकि एक डिजिटल यूनिवर्सिटी विविध भाषाओं में उच्च गुणवतापूर्ण उच्च शिक्षा तक बेहतर पहुंच प्रदान करने में सक्षम होगा और यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ संरेखित होगा। विभिन्न विश्वविद्यालय से सलाह लेकर हमारे वर्तमान UGC प्रमुख इस दिशा में कार्य करना शुरू कर दिए हैं।
अपनी भाषा में उच्चस्तरीय सामग्री, कुशल और सृजनशील शिक्षकों से अध्ययन, लोगों तक शिक्षा की पहुंच, कौशल विकास के साथ-साथ सामाजिकता और नैतिकता पूर्ण शिक्षण व्यवस्था शिक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के सपने को मजबूती प्रदान करेगा। किसी भी देश के लिए व देश में बदलाव के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण औजार है, अतः शिक्षण के एक माध्यम के रूप में ऑनलाइन पद्धति को अपनाकर शिक्षा क्षेत्र में और मानव पूँजी निर्माण में आत्मनिर्भरता पाई जा सकती है जो आजादी के अमृत महोत्सव के 75वें वर्ष में लालकिले की प्राचीर से भारत को 2047 तक एक विकसित देश की श्रेणी में खड़ा करने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य में आधार का काम करेगा।
निष्कर्षतः हम कह सकते हैं कि ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में कोविड ने नए विकल्प खोले हैं और थोड़े बहुत अनुभव भी प्रदान किये हैं। हम प्राचीन काल से ही मनुष्य और यंत्र के बीच के अन्तर्सम्बन्ध को अपने विकेकानुसार उपयोग करते चले आ रहे हैं। यंत्रों ने मनुष्य की क्षमता और संभावना उजागर की है और उसे महान रचयिता और आविष्कारक बनाया है। जिससे मनुष्य की इच्छाएं अनंत होती जा रही हैं, ऐसी स्थिति में विवेक निर्णायक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में वर्णित विवेक द्वारा संचालित ऑनलाइन एजुकेशन वास्तव में शिक्षा के परिणाम और गुणवत्ता को अनंत संभावनाओं की ओर ले जा सकता है। इस तरह उचित कार्यान्वयन क्षमता द्वारा ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली छात्रो में सामाजिकता, नैतिकता, परस्पर उत्साह का वैसा संचार करने में सक्षम होगी, जिस तरह से भौतिक रूप से होने वाला शिक्षण कार्य करता है।